तुझको तनहाइयों में , सजाते रहे , 
उम्र भर यूँ ही हम , गुनगुनाते रहे ! 

तेरी ख़ामोशियों से , नहीं था गिला , 
ख़ुद को ही सुनते और , सुनाते रहे !